Wednesday, July 11, 2007

ये दिल तुम बिन कहीँ लगता नहीं

ये दिल तुम बिन कहीँ लगता नहीं
हम क्या करें
ये दिल तुम बिन कहीँ लगता नहीं
हम क्या करें
तसव्वुर में कोई बसता नहीं हम क्या करें
तुम ही कह दो अब ए जाने वफ़ा हम क्या करें


लुटे दिल में दिया जला नहीं
tumhi कह दो अब ए jaane अदा हम क्या करें

किसी के दिल में बस के दिल को तड़पाना नहीं अच्छा
निगाहों को झलक दे दे के छुप जाना नहीं अच्छा
उम्मीदों के खिले गुलशन को झुल्सना नहीं अछ्छा
हमें तुम बिन कोई जंचता नहीं
हम क्या करें


मोहब्बत कर तो लें लेकिन
मोहब्बत रास आये भी
दिलों को बोझ लगते हैं कभी ज़ुल्फ़ों के साए भी
हज़ारों गम हैं इस दुनिया में
अपने भी पराये भी
मोहब्बत ही का गम तनहा नहीं हम क्या करें


ये दिल तुम बिन कहीँ लगता नहीं हम क्या करें



बुझा दो आग दिल की या
इसे खुल कर हवा दे दो
बुझा दो आग दिल कि या
इसे खुल कर हवा दे दो
जो इस का मोल दे पाये उसे अपन वफ़ा दे दो
तुम्हारे दिल में क्या है हमें बस इतना पता दे दो
कि अब तनहा सफ़र कटता नहीं हम क्या करें
लुटे दिल में दिया जलता नहीं हम क्या करें



ye dil tum bin kahin lagta nahin
hum kya karein
ye dil tum bin kahin lagta nahin
hum kya karein
tasavvur min koi bastaa nahin hum kya karein
tum hi keh do ab ae jaane vafa hum kya karein


lute dil mein diya jala nahin
tumhi keh do ab ae jaane adaa hum kya karein

kisi ke dil mein bas ke dil ko tadpana nahin achchha
nigahon ko jhalak de de ke chup jana nahin achchha
ummedon ke khile gulshan ko jhulsana nahin achhchha
humein tum bin koi janchta nahin
hum kya karein


mohabbat kar to lein lekin
mohabbat ras aaye bhi
dillon ko bojh lagte hain kabhi zulfon ke saaye bhi
hazaron gham hain is duniya mein
apne bhi paraye bhi
mohabbat hi ka ghum tanha nahin hum kya karein

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